Friday, 23 March 2012
Thursday, 22 March 2012
आज तिरंगा रॊता है.......
_______________ _______________ _________
रक्षक ही भक्षक बन कर,जब हाँथ लहू सॆ धॊता है !!
भारत माँ की हालत पर, अब राष्ट्र -तिरंगा रॊता है !!
... कॆशर की कॊमल कलियाँ, झुलस रहीं हैं शॊलॊं सॆ,
हिम-गिरि भी काँप रहा है,आतंकवाद कॆ गॊलॊं सॆ,
बातॆं कश्मीर विभाजन की,कहीं नीर विभाजन हॊता है !!१!!
भारत माँ की हालत पर, अब............. ............
नाँग अनॆकॊं खादी पहनॆं,कुर्सी ऊपर मटक रहॆ हैं,
भगतसिंह कॆ नारॆ दॆखॊ,सूली ऊपर लटक रहॆ हैं,
प्रजातंत्र कॆ आँगन मॆं ही, जब प्रलय प्रजा पर हॊता है !!२!!
भारत माँ की हालत पर, अब............. ............... ....
गंगा यमुना का पावन जल,दॆखॊ लहू-लुहान हुआ,
उन अमर शहीदॊं का, व्यर्थ यहाँ बलिदान हुआ,
मज़दूर भूख सॆ तड़प रहा, और मंत्री कुर्सी पर सॊता है !!३!!
भारत माँ की हालत पर, अब............. ............... ....
एक दहॆज़ की डॊली, घर दौलत सॆ भर दॆती है,
एक दहॆज़ बिन घुट-घुट,आत्म-दा ह कर लॆती है,
सात रंग कॆ स्वप्न सजायॆ, यह कपटी मानव सॊता है !!४!!
भारत माँ की हालत पर, अब............. ............... ....
बसंती चूनर गानॆं वालॊ, गुमनाम यहाँ हॊ जाऒगॆ,
"राज़"अगर फिर आयॆ तॊ,बदनाम यहाँ हॊ जाऒगॆ,
इस कुर्सी की नीलामी मॆं जानॆ, आगॆ क्या-क्या हॊता है !!५!!
भारत माँ की हालत पर, अब............. ............... ....
"कवि-राजबुंदॆली
संकलन कर्ता
प्रभात कुमार भारद्वाज"परवाना"
(समाज सेवक)
ब्लॉग का पता : http:// prabhatbhardwaj.blogspot.in/
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रक्षक ही भक्षक बन कर,जब हाँथ लहू सॆ धॊता है !!
भारत माँ की हालत पर, अब राष्ट्र -तिरंगा रॊता है !!
... कॆशर की कॊमल कलियाँ, झुलस रहीं हैं शॊलॊं सॆ,
हिम-गिरि भी काँप रहा है,आतंकवाद कॆ गॊलॊं सॆ,
बातॆं कश्मीर विभाजन की,कहीं नीर विभाजन हॊता है !!१!!
भारत माँ की हालत पर, अब............. ............
नाँग अनॆकॊं खादी पहनॆं,कुर्सी ऊपर मटक रहॆ हैं,
भगतसिंह कॆ नारॆ दॆखॊ,सूली ऊपर लटक रहॆ हैं,
प्रजातंत्र कॆ आँगन मॆं ही, जब प्रलय प्रजा पर हॊता है !!२!!
भारत माँ की हालत पर, अब............. ............... ....
गंगा यमुना का पावन जल,दॆखॊ लहू-लुहान हुआ,
उन अमर शहीदॊं का, व्यर्थ यहाँ बलिदान हुआ,
मज़दूर भूख सॆ तड़प रहा, और मंत्री कुर्सी पर सॊता है !!३!!
भारत माँ की हालत पर, अब............. ............... ....
एक दहॆज़ की डॊली, घर दौलत सॆ भर दॆती है,
एक दहॆज़ बिन घुट-घुट,आत्म-दा ह कर लॆती है,
सात रंग कॆ स्वप्न सजायॆ, यह कपटी मानव सॊता है !!४!!
भारत माँ की हालत पर, अब............. ............... ....
बसंती चूनर गानॆं वालॊ, गुमनाम यहाँ हॊ जाऒगॆ,
"राज़"अगर फिर आयॆ तॊ,बदनाम यहाँ हॊ जाऒगॆ,
इस कुर्सी की नीलामी मॆं जानॆ, आगॆ क्या-क्या हॊता है !!५!!
भारत माँ की हालत पर, अब............. ............... ....
"कवि-राजबुंदॆली
संकलन कर्ता
प्रभात कुमार भारद्वाज"परवाना"
(समाज सेवक)
ब्लॉग का पता : http://
Wednesday, 21 March 2012
मनवा मेरा कब से प्यासा, दर्शन दे दो राम,
तेरे चरणों में हैं बसते जग के सारे धाम
जय-जय राम सीताराम, जय-जय राम सीताराम
अयोध्या नगरी में तुम जन्मे , दशरथ पुत्र कहाये,
विश्वामित्र थे गुरु तुम्हारे, कौशल्या के जाये,
ऋषि मुनियों की रक्षा करके तुमने किया है नाम
तुलसी जैसे भक्त तुम्हारे, बांटें जग में ज्ञान
जय-जय राम सीताराम, जय-जय राम सीताराम
मनवा मेरा कब से प्यासा, दर्शन दे दो राम
सुग्रीव-विभीषण मित्र तुम्हारे, केवट- शबरी साधक,
भ्राता लक्ष्मण संग तुम्हारे, राक्षस सारे बाधक,
बालि-रावण को संहारा, सौंपा अदभुद धाम
जटायु सा भक्त आपका आया रण में काम
जय-जय राम सीताराम, जय-जय राम सीताराम
मनवा मेरा कब से प्यासा, दर्शन दे दो राम
शिव जी ठहरे तेरे साधक, हनुमत भक्त कहाते,
जिन पर कृपा तुम्हारी होती वो तेरे हो जाते,
सबको अपनी शरण में ले लो, दे दो अपना धाम
जग में हम सब चाहें तुझसे, भक्ति का वरदान
जय-जय राम सीताराम, जय-जय राम सीताराम
मनवा मेरा कब से प्यासा, दर्शन दे दो राम
मोक्ष-वोक्ष कुछ मैं ना माँगूं , कर्मयोग तुम देना,
जब भी जग में मैं गिर जाऊँ मुझको अपना लेना,
कृष्ण और साईं रूप तुम्हारे, करते जग कल्याण
कैसे करुँ वंदना तेरी , दे दो मुझको ज्ञान
जय-जय राम सीताराम, जय-जय राम सीताराम.
मनवा मेरा कब से प्यासा, दर्शन दे दो राम
जो भी चलता राह तुम्हारी, जग उसका हो जाता,
लव-कुश जैसे पुत्र वो पाए, भरत से मिलते भ्राता,
उसके दिल में तुम बस जाना जो ले-ले तेरा नाम
भक्ति सहित अम्बरीष ये सौंपे तुझको अपना प्रणाम
जय-जय राम सीताराम, जय-जय राम सीताराम
मनवा मेरा कब से प्यासा, दर्शन दे दो राम
मनवा मेरा कब से प्यासा, दर्शन दे दो राम
तेरे चरणों में हैं बसते जग के सारे धाम
जय-जय राम सीताराम, जय-जय राम सीताराम.
तेरे चरणों में हैं बसते जग के सारे धाम
जय-जय राम सीताराम, जय-जय राम सीताराम
अयोध्या नगरी में तुम जन्मे , दशरथ पुत्र कहाये,
विश्वामित्र थे गुरु तुम्हारे, कौशल्या के जाये,
ऋषि मुनियों की रक्षा करके तुमने किया है नाम
तुलसी जैसे भक्त तुम्हारे, बांटें जग में ज्ञान
जय-जय राम सीताराम, जय-जय राम सीताराम
मनवा मेरा कब से प्यासा, दर्शन दे दो राम
सुग्रीव-विभीषण मित्र तुम्हारे, केवट- शबरी साधक,
भ्राता लक्ष्मण संग तुम्हारे, राक्षस सारे बाधक,
बालि-रावण को संहारा, सौंपा अदभुद धाम
जटायु सा भक्त आपका आया रण में काम
जय-जय राम सीताराम, जय-जय राम सीताराम
मनवा मेरा कब से प्यासा, दर्शन दे दो राम
शिव जी ठहरे तेरे साधक, हनुमत भक्त कहाते,
जिन पर कृपा तुम्हारी होती वो तेरे हो जाते,
सबको अपनी शरण में ले लो, दे दो अपना धाम
जग में हम सब चाहें तुझसे, भक्ति का वरदान
जय-जय राम सीताराम, जय-जय राम सीताराम
मनवा मेरा कब से प्यासा, दर्शन दे दो राम
मोक्ष-वोक्ष कुछ मैं ना माँगूं , कर्मयोग तुम देना,
जब भी जग में मैं गिर जाऊँ मुझको अपना लेना,
कृष्ण और साईं रूप तुम्हारे, करते जग कल्याण
कैसे करुँ वंदना तेरी , दे दो मुझको ज्ञान
जय-जय राम सीताराम, जय-जय राम सीताराम.
मनवा मेरा कब से प्यासा, दर्शन दे दो राम
जो भी चलता राह तुम्हारी, जग उसका हो जाता,
लव-कुश जैसे पुत्र वो पाए, भरत से मिलते भ्राता,
उसके दिल में तुम बस जाना जो ले-ले तेरा नाम
भक्ति सहित अम्बरीष ये सौंपे तुझको अपना प्रणाम
जय-जय राम सीताराम, जय-जय राम सीताराम
मनवा मेरा कब से प्यासा, दर्शन दे दो राम
मनवा मेरा कब से प्यासा, दर्शन दे दो राम
तेरे चरणों में हैं बसते जग के सारे धाम
जय-जय राम सीताराम, जय-जय राम सीताराम.

Saturday, 17 March 2012
पुरे देश को Colgate, Closeup, Pepsodent के नाम पर ज़हर बेचा जा रहा है। लेकिन देश की भ्रष्ट सरकार और बिका हुआ मीडिया अपने मुँह में फेवीकोल डाल कर बैठे हैं।
http://indiatoday.intoday.in/ story/ toothpastes-contain-cancer-caus ing-nicotine-study/1/ 150836.html
इनको सिर्फ़ दूध, घी, मावा आदि में ही जहर नजर आता हैं, वो भी दिवाली के दिनो में ताकि विदेशी कंपनियो का माल (कैडबरी) बिके। लेकिन ये अमेरिकन कंपनिया पिछले 40 साल से देश के लोगो को ज़हर बेच रही हैं। वो सरकार और मीडिया को दिखाई नहीं देता।
लेकिन हमारा आपका और सच्चे देश भक्त का ये फ़र्ज बनता हैं। इस सच को देश की आम जनता तक पहुँचाये और एक खास ख़बर।
क्या आप जानते है ?? 11 सितम्बर 2011 को (DIPRAS) Delhi Institute of Pharmaceutical Science and Research में बड़ी-बड़ी कंपनियों के Toothpastes को चेक किया गया। जिसमें Nicotine पाया मिला है और 1 ग्राम Toothpaste में 8 सिगरेट जितना Nicotine पाया गया है। मतलब सुबह उठते आपने 1 ग्राम Toothpaste अपने मुँह में घुमाया तो 8 सिगरेट जितना Nicotine आपके अंदर और एक खास बात इन विदेशी Toothpastes में (Fluoride) 1000 PPM से ज्यादा पाया जाता है और पुरी दुनिया के Dentist इस बात से सहमत है कोई भी Toothpaste जिसमें (Fluoride) होता और 1000 PPM से ज्यादा होता है वो Toothpaste फ़िर Toothpaste नहीं रहता जहर हो जाता है।
इसलिए आप लोग इस विदेशी कंपनी का मंजन न इस्तेमाल करें और इसे भारत से भगाएँ। इसके स्थान पर आप विको बज्रदंती, डाबर, नीम, एंकर, मिसवाक, बबूल, प्रॉमिस, सहारा, दंतकान्ति, लाल दंत मंजन, बैद्यनाथ, अजंता आदि इस्तेमाल कर सकते हैं। इसे आपका स्वास्थ्य पर भी की प्रभाव नहीं पड़ेगा और स्वदेशी को भी बढ़ावा मिलेगा।
"अब इसमें तो कोई टेक्नालजी नहीं है इसे तो भारत का ही इस्तेमाल कर सकते हैं और विदेशी लूट से देश को बचा सकते हैं।"
आप इस लिस्ट को देख सकते हैं :
http:// swadeshi.shreshthbharat.in/ download/list/otc/otc.pdf
अधिक जानकारी::
https://www.facebook.com/ photo.php?fbid=328062740557042& set=a.222302067799777.69335.22 2235904473060&type=3
जय हिन्द, जय भारत !!
स्वदेशी, स्वावलंबी, स्वाभिमानी भारत !!
http://indiatoday.intoday.in/
इनको सिर्फ़ दूध, घी, मावा आदि में ही जहर नजर आता हैं, वो भी दिवाली के दिनो में ताकि विदेशी कंपनियो का माल (कैडबरी) बिके। लेकिन ये अमेरिकन कंपनिया पिछले 40 साल से देश के लोगो को ज़हर बेच रही हैं। वो सरकार और मीडिया को दिखाई नहीं देता।
लेकिन हमारा आपका और सच्चे देश भक्त का ये फ़र्ज बनता हैं। इस सच को देश की आम जनता तक पहुँचाये और एक खास ख़बर।
क्या आप जानते है ?? 11 सितम्बर 2011 को (DIPRAS) Delhi Institute of Pharmaceutical Science and Research में बड़ी-बड़ी कंपनियों के Toothpastes को चेक किया गया। जिसमें Nicotine पाया मिला है और 1 ग्राम Toothpaste में 8 सिगरेट जितना Nicotine पाया गया है। मतलब सुबह उठते आपने 1 ग्राम Toothpaste अपने मुँह में घुमाया तो 8 सिगरेट जितना Nicotine आपके अंदर और एक खास बात इन विदेशी Toothpastes में (Fluoride) 1000 PPM से ज्यादा पाया जाता है और पुरी दुनिया के Dentist इस बात से सहमत है कोई भी Toothpaste जिसमें (Fluoride) होता और 1000 PPM से ज्यादा होता है वो Toothpaste फ़िर Toothpaste नहीं रहता जहर हो जाता है।
इसलिए आप लोग इस विदेशी कंपनी का मंजन न इस्तेमाल करें और इसे भारत से भगाएँ। इसके स्थान पर आप विको बज्रदंती, डाबर, नीम, एंकर, मिसवाक, बबूल, प्रॉमिस, सहारा, दंतकान्ति, लाल दंत मंजन, बैद्यनाथ, अजंता आदि इस्तेमाल कर सकते हैं। इसे आपका स्वास्थ्य पर भी की प्रभाव नहीं पड़ेगा और स्वदेशी को भी बढ़ावा मिलेगा।
"अब इसमें तो कोई टेक्नालजी नहीं है इसे तो भारत का ही इस्तेमाल कर सकते हैं और विदेशी लूट से देश को बचा सकते हैं।"
आप इस लिस्ट को देख सकते हैं :
http://
अधिक जानकारी::
https://www.facebook.com/
जय हिन्द, जय भारत !!
स्वदेशी, स्वावलंबी, स्वाभिमानी भारत !!
कृपया इसे एक बार अंत तक अवश्य पड़ें ! और शेयर करें ताकि यह अमूल्य जानकारी सब पहुंचे ! और सबको समझ आ जाए की हिन्दू धर्मं क्या है !!
इस कलिकाल में 'श्रीमद्भागवत पुराण' हिन्दू समाज का सर्वाधिक आदरणीय पुराण है। यह वैष्णव सम्प्रदाय का प्रमुख ग्रन्थ है। इस ग्रन्थ में वेदों, उपनिषदों तथा दर्शन शास्त्र के गूढ़ एवं रहस्यमय विषयों को अत्यन्त सरलता के साथ निरूपित किया गया है। इसे भारतीय धर्म और संस्कृति का विश्वकोश कहना अधिक समीचीन होगा। सैकड़ों वर्षों से यह पुराण हिन्दू समाज की धार्मिक, सामाजिक और लौकिक मर्यादाओं की स्थापना में महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा करता आ रहा हैं।
इस पुराण में सकाम कर्म, निष्काम कर्म, ज्ञान साधना, सिद्धि साधना, भक्ति, अनुग्रह, मर्यादा, द्वैत-अद्वैत, द्वैताद्वैत, निर्गुण-सगुण तथा व्यक्त-अव्यक्त रहस्यों का समन्वय उपलब्ध होता है। 'श्रीमद्भागवत पुराण' वर्णन की विशदता और उदात्त काव्य-रमणीयता से ओतप्रोत है। यह विद्या का अक्षय भण्डार है।
*************सृष्टि-उत्पत्ति***************
सृष्टि-उत्पत्ति के सन्दर्भ में इस पुराण में कहा गया है- एकोऽहम्बहुस्यामि। अर्थात् एक से बहुत होने की इच्छा के फलस्वरूप भगवान स्वयं अपनी माया से अपने स्वरूप में काल, कर्म और स्वभाव को स्वीकार कर लेते हैं। तब काल से तीनों गुणों- सत्व, रज और तम में क्षोभ उत्पन्न होता है तथा स्वभाव उस क्षोभ को रूपान्तरित कर देता है। तब कर्म गुणों के महत्त्व को जन्म देता है जो क्रमश: अहंकार, आकाश, वायु तेज, जल, पृथ्वी, मन, इन्द्रियाँ और सत्व में परिवर्तित हो जाते हैं। इन सभी के परस्पर मिलने से व्यष्टि-समष्टि रूप पिंड और ब्रह्माण्ड की रचना होती है। यह ब्रह्माण्ड रूपी अण्डां एक हज़ार वर्ष तक ऐसे ही पड़ा रहा। फिर भगवान ने उसमें से सहस्त्र मुख और अंगों वाले विराट पुरुष को प्रकट किया। उस विराट पुरुष के मुख से ब्राह्मण, भुजाओं से क्षत्रिओं से क्षत्रिय, जांघों से वैश्य और पैरों से शूद्र उत्पन्न हुए।
विराट पुरुष रूपी नर से उत्पन्न होने के कारण जल को 'नार' कहा गया। यह नार ही बाद में 'नारायण' कहलाया। कुल दस प्रकार की सृष्टियाँ बताई गई हैं। महत्तत्व, अहंकार, तन्मात्र, इन्दियाँ, इन्द्रियों के अधिष्ठाता देव 'मन' और अविद्या- ये छह प्राकृत सृष्टियाँ हैं। इनके अलावा चार विकृत सृष्टियाँ हैं, जिनमें स्थावर वृक्ष, पशु-पक्षी, मनुष्य और देव आते हैं।
**************काल गणना***************
'श्रीमद्भागवत पुराण' में काल गणना भी अत्यधिक सूक्ष्म रूप से की गई है। वस्तु के सूक्ष्मतम स्वरूप को 'परमाणु' कहते हैं। दो परमाणुओं से एक 'अणु' और तीन अणुओं से मिलकर एक 'त्रसरेणु' बनता है। तीन त्रसरेणुओं को पार करने में सूर्य किरणों को जितना समय लगता है, उसे 'त्रुटि' कहते हैं। त्रुटि का सौ गुना 'कालवेध' होता है और तीन कालवेध का एक 'लव' होता है। तीन लव का एक 'निमेष', तीन निमेष का एक 'क्षण' तथा पाँच क्षणों का एक 'काष्टा' होता है। पन्द्रह काष्टा का एक 'लघु', पन्द्रह लघुओं की एक 'नाड़िका' अथवा 'दण्ड' तथा दो नाड़िका या दण्डों का एक 'मुहूर्त' होता है। छह मुहूर्त का एक 'प्रहर' अथवा 'याम' होता है।
युग वर्ष
सत युग चार हज़ार आठ सौ
त्रेता युग तीन हज़ार छह सौ
द्वापर युग दो हज़ार चार सौ
कलि युग एक हज़ार दो सौ
प्रत्येक मनु 7,16,114 चतुर्युगों तक अधिकारी रहता है। ब्रह्मा के एक 'कल्प' में चौदह मनु होते हैं। यह ब्रह्मा की प्रतिदिन की सृष्टि है। सोलह विकारों (प्रकृति, महत्तत्व, अहंकार, पाँच तन्मात्रांए, दो प्रकार की इन्द्रियाँ, मन और पंचभूत) से बना यह ब्रह्माण्डकोश भीतर से पचास करोड़ योजन विस्तार वाला है। उसके ऊपर दस-दस आवरण हैं। ऐसी करोड़ों ब्रह्माण्ड राशियाँ, जिस ब्रह्माण्ड में परमाणु रूप में दिखाई देती हैं, वही परमात्मा का परमधाम है। इस प्रकार पुराणकार ने ईश्वर की महत्ता, काल की महानता और उसकी तुलना में चराचर पदार्थ अथवा जीव की अत्यल्पता का विशद् विवेचन प्रस्तुत किया है।
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इस कलिकाल में 'श्रीमद्भागवत पुराण' हिन्दू समाज का सर्वाधिक आदरणीय पुराण है। यह वैष्णव सम्प्रदाय का प्रमुख ग्रन्थ है। इस ग्रन्थ में वेदों, उपनिषदों तथा दर्शन शास्त्र के गूढ़ एवं रहस्यमय विषयों को अत्यन्त सरलता के साथ निरूपित किया गया है। इसे भारतीय धर्म और संस्कृति का विश्वकोश कहना अधिक समीचीन होगा। सैकड़ों वर्षों से यह पुराण हिन्दू समाज की धार्मिक, सामाजिक और लौकिक मर्यादाओं की स्थापना में महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा करता आ रहा हैं।
इस पुराण में सकाम कर्म, निष्काम कर्म, ज्ञान साधना, सिद्धि साधना, भक्ति, अनुग्रह, मर्यादा, द्वैत-अद्वैत, द्वैताद्वैत, निर्गुण-सगुण तथा व्यक्त-अव्यक्त रहस्यों का समन्वय उपलब्ध होता है। 'श्रीमद्भागवत पुराण' वर्णन की विशदता और उदात्त काव्य-रमणीयता से ओतप्रोत है। यह विद्या का अक्षय भण्डार है।
*************सृष्टि-उत्पत्ति***************
सृष्टि-उत्पत्ति के सन्दर्भ में इस पुराण में कहा गया है- एकोऽहम्बहुस्यामि। अर्थात् एक से बहुत होने की इच्छा के फलस्वरूप भगवान स्वयं अपनी माया से अपने स्वरूप में काल, कर्म और स्वभाव को स्वीकार कर लेते हैं। तब काल से तीनों गुणों- सत्व, रज और तम में क्षोभ उत्पन्न होता है तथा स्वभाव उस क्षोभ को रूपान्तरित कर देता है। तब कर्म गुणों के महत्त्व को जन्म देता है जो क्रमश: अहंकार, आकाश, वायु तेज, जल, पृथ्वी, मन, इन्द्रियाँ और सत्व में परिवर्तित हो जाते हैं। इन सभी के परस्पर मिलने से व्यष्टि-समष्टि रूप पिंड और ब्रह्माण्ड की रचना होती है। यह ब्रह्माण्ड रूपी अण्डां एक हज़ार वर्ष तक ऐसे ही पड़ा रहा। फिर भगवान ने उसमें से सहस्त्र मुख और अंगों वाले विराट पुरुष को प्रकट किया। उस विराट पुरुष के मुख से ब्राह्मण, भुजाओं से क्षत्रिओं से क्षत्रिय, जांघों से वैश्य और पैरों से शूद्र उत्पन्न हुए।
विराट पुरुष रूपी नर से उत्पन्न होने के कारण जल को 'नार' कहा गया। यह नार ही बाद में 'नारायण' कहलाया। कुल दस प्रकार की सृष्टियाँ बताई गई हैं। महत्तत्व, अहंकार, तन्मात्र, इन्दियाँ, इन्द्रियों के अधिष्ठाता देव 'मन' और अविद्या- ये छह प्राकृत सृष्टियाँ हैं। इनके अलावा चार विकृत सृष्टियाँ हैं, जिनमें स्थावर वृक्ष, पशु-पक्षी, मनुष्य और देव आते हैं।
**************काल गणना***************
'श्रीमद्भागवत पुराण' में काल गणना भी अत्यधिक सूक्ष्म रूप से की गई है। वस्तु के सूक्ष्मतम स्वरूप को 'परमाणु' कहते हैं। दो परमाणुओं से एक 'अणु' और तीन अणुओं से मिलकर एक 'त्रसरेणु' बनता है। तीन त्रसरेणुओं को पार करने में सूर्य किरणों को जितना समय लगता है, उसे 'त्रुटि' कहते हैं। त्रुटि का सौ गुना 'कालवेध' होता है और तीन कालवेध का एक 'लव' होता है। तीन लव का एक 'निमेष', तीन निमेष का एक 'क्षण' तथा पाँच क्षणों का एक 'काष्टा' होता है। पन्द्रह काष्टा का एक 'लघु', पन्द्रह लघुओं की एक 'नाड़िका' अथवा 'दण्ड' तथा दो नाड़िका या दण्डों का एक 'मुहूर्त' होता है। छह मुहूर्त का एक 'प्रहर' अथवा 'याम' होता है।
युग वर्ष
सत युग चार हज़ार आठ सौ
त्रेता युग तीन हज़ार छह सौ
द्वापर युग दो हज़ार चार सौ
कलि युग एक हज़ार दो सौ
प्रत्येक मनु 7,16,114 चतुर्युगों तक अधिकारी रहता है। ब्रह्मा के एक 'कल्प' में चौदह मनु होते हैं। यह ब्रह्मा की प्रतिदिन की सृष्टि है। सोलह विकारों (प्रकृति, महत्तत्व, अहंकार, पाँच तन्मात्रांए, दो प्रकार की इन्द्रियाँ, मन और पंचभूत) से बना यह ब्रह्माण्डकोश भीतर से पचास करोड़ योजन विस्तार वाला है। उसके ऊपर दस-दस आवरण हैं। ऐसी करोड़ों ब्रह्माण्ड राशियाँ, जिस ब्रह्माण्ड में परमाणु रूप में दिखाई देती हैं, वही परमात्मा का परमधाम है। इस प्रकार पुराणकार ने ईश्वर की महत्ता, काल की महानता और उसकी तुलना में चराचर पदार्थ अथवा जीव की अत्यल्पता का विशद् विवेचन प्रस्तुत किया है।
—
सचिन के सतक बनाने पे बयान।
1. सचिन आर. एस. एस. के एजेन्ट हे
क्योंकि मुस्लिम देश के खिलाफ सतक बनाया -
पिग्विजय सिंह.
2. मैं सचिन को सतक की बधाई देता हूँ और
सोनिया जी की नेतृत्व की तारीफ़ करता हूँ-
मनमोहन सिंह
3. सचिन के सतक का श्रेय
मेरी दादी को जाना चाहिए. क्योंकि उन्होंने
ही बांग्ला देश बनाया था - राहुल गाँधी।
4. सचिन ने सतक बना के ये साबित कर
दिया की वो मराठी हे - राज ठाकरे
5. सचिन को लोकपाल बना देना चाहिए- टीम
अन्ना
6. गुप्त बिमारी के कारण सोनिया जी ने
मीडिया से बात नहीं करी..
7. सचिन चाहे जितने रन बनाये पर उतने रन
कभी नही बना सकता जितना भारत
का काला धन विदेशों मे जमा है । --
बाबा रामदेव जी
8. आज बान्ग्ला देश ने भारत का कर्ज अदा कर
दिया इसलिये बान्ग्लादेशियों को अब भारत मे
बे रोक - टोक बसने देना चाहिये । --
स्वामी अग्नीवेश
9. अब हमे पूरी उम्मीद है की सचिन 2015 तक
150 शतक जरूर बना लेंगें । -- भरतीय टीम के
चयनकर्ता
10. अब हम कम से कम 100 दिन तक बिना एक
भी पैसा लिये सचिन क्रिकेट कान्ड का पाठ
करेंगें -- सभी बिकाऊ मीडीया
11. अब बूस्ट और पेप्सी पे किसी को भी शक
नही होना चाहिये - देश
की लुटेरी विदेशी कंप्निया
12. आईला.. अब मै़ रिटायर ना होने
का क्या बहाना बनाऊ। --- खुद सचिन
1. सचिन आर. एस. एस. के एजेन्ट हे
क्योंकि मुस्लिम देश के खिलाफ सतक बनाया -
पिग्विजय सिंह.
2. मैं सचिन को सतक की बधाई देता हूँ और
सोनिया जी की नेतृत्व की तारीफ़ करता हूँ-
मनमोहन सिंह
3. सचिन के सतक का श्रेय
मेरी दादी को जाना चाहिए. क्योंकि उन्होंने
ही बांग्ला देश बनाया था - राहुल गाँधी।
4. सचिन ने सतक बना के ये साबित कर
दिया की वो मराठी हे - राज ठाकरे
5. सचिन को लोकपाल बना देना चाहिए- टीम
अन्ना
6. गुप्त बिमारी के कारण सोनिया जी ने
मीडिया से बात नहीं करी..
7. सचिन चाहे जितने रन बनाये पर उतने रन
कभी नही बना सकता जितना भारत
का काला धन विदेशों मे जमा है । --
बाबा रामदेव जी
8. आज बान्ग्ला देश ने भारत का कर्ज अदा कर
दिया इसलिये बान्ग्लादेशियों को अब भारत मे
बे रोक - टोक बसने देना चाहिये । --
स्वामी अग्नीवेश
9. अब हमे पूरी उम्मीद है की सचिन 2015 तक
150 शतक जरूर बना लेंगें । -- भरतीय टीम के
चयनकर्ता
10. अब हम कम से कम 100 दिन तक बिना एक
भी पैसा लिये सचिन क्रिकेट कान्ड का पाठ
करेंगें -- सभी बिकाऊ मीडीया
11. अब बूस्ट और पेप्सी पे किसी को भी शक
नही होना चाहिये - देश
की लुटेरी विदेशी कंप्निया
12. आईला.. अब मै़ रिटायर ना होने
का क्या बहाना बनाऊ। --- खुद सचिन
Friday, 16 March 2012
बिहार में आलू उत्पादन का विश्व कीर्तिमान !!
बिहार के नालंदा जिले में कतरीसराय प्रखंड के देशपुरवा गांव के किसानों ने आलू उत्पादन का विश्व कीर्तिमान बनाया है।
मुख्यमंत्री के गृह जनपद, नालंदा के देशपुरवा गांव के किसानों ने जैविक खेती के माध्यम से प्रति हेक्टेयर 729 क्विंटल आलू पैदा किया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक इतना उत्पादन कहीं भी दर्ज नहीं किया गया है। खेत से आलू निकालने के लिए केंद्रीय कृषि मंत्रालय के वरिष्ठ तकनीकी अधिकारियों का एक दल भी यहां पहुंचा।
फसल जांच सांख्यिकी विभाग द्वारा निर्धारित मापदंड के अनुसार 10.05 मीटर क्षेत्रफल से निकाले गए आलू का वजन 364.5 किलोग्राम पाया गया। नालंदा के जिलाधिकारी संजय कुमार अग्रवाल ने कहा है कि जैविक खेती के जरिए आलू के उत्पादन में देशपुरवा के किसानों ने नया कीर्तिमान बनाया है। उन्होंने कहा कि किसानों की मेहनत और सरकारी योजनाओं के लाभ के कारण ऐसी स्थिति हासिल की जा सकी है। किसान नीतीश कुमार ने कहा कि उन्होंने खेत में गोबर की खाद, वर्मी कंपोस्ट, वॉम स्टार सहित कई मिश्रणों का इस्तेमाल किया।
गौरतलब है कि नालंदा में राज्य जैविक सब्जी प्रोत्साहन कार्यक्रम के तहत 2,500 हेक्टेयर में किसानों को जैविक उत्पादन क्रय करने का लाभ दिया जा रहा है। आलू उत्पादन का यह रिकार्ड अन्य किसानों के बीच व्याप्त कई भ्रांतियों को दूर करेगा।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बुधवार को बिहार विधानसभा में नालंदा के किसानों को आलू उत्पादन में रिकार्ड बनाने के लिए बधाई दी। उन्होंने सदन को सूचित किया कि नालंदा के किसानों ने जैविक खेती के जरिए प्रति हेक्टेयर 729 क्विंटल आलू का उत्पादन किया है। अब तक यह रिकार्ड हॉलैंड के नाम था, जहां प्रति हेक्टेयर 535 क्विंटल आलू का उत्पादन हुआ था। उल्लेखनीय है कि देशपुरवा के किसानों ने श्रीविधि तकनीक से धान का उत्पादन प्रति हेक्टेयर 224 क्विंटल तक पहुंचा दिया है, जबकि पारंपरिक तरीके से यहां प्रति हेक्टेयर धान का उत्पादन 80 क्विंटल होता था। नालंदा के जिलाधिकारी भी मानते है कि केवल देशपुरवा के निवासी ही नहीं, बल्कि जिले के सैकड़ों किसान उत्पादन में अभूतपूर्व वृद्धि कर रहे है। उन्होंने कहा कि पहले तो किसान पारंपरिक खेती को छोड़ने और आधुनिक तकनीक अपनाने को तैयार ही नहीं थे, परंतु प्रशासन द्वारा नई तकनीक से होने वाले नुकसान की भरपाई किए जाने के वादे के बाद किसान तैयार हो गए और अब नतीजा सबके सामने है।
By: Ravi Tiwari
बिहार के नालंदा जिले में कतरीसराय प्रखंड के देशपुरवा गांव के किसानों ने आलू उत्पादन का विश्व कीर्तिमान बनाया है।
मुख्यमंत्री के गृह जनपद, नालंदा के देशपुरवा गांव के किसानों ने जैविक खेती के माध्यम से प्रति हेक्टेयर 729 क्विंटल आलू पैदा किया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक इतना उत्पादन कहीं भी दर्ज नहीं किया गया है। खेत से आलू निकालने के लिए केंद्रीय कृषि मंत्रालय के वरिष्ठ तकनीकी अधिकारियों का एक दल भी यहां पहुंचा।
फसल जांच सांख्यिकी विभाग द्वारा निर्धारित मापदंड के अनुसार 10.05 मीटर क्षेत्रफल से निकाले गए आलू का वजन 364.5 किलोग्राम पाया गया। नालंदा के जिलाधिकारी संजय कुमार अग्रवाल ने कहा है कि जैविक खेती के जरिए आलू के उत्पादन में देशपुरवा के किसानों ने नया कीर्तिमान बनाया है। उन्होंने कहा कि किसानों की मेहनत और सरकारी योजनाओं के लाभ के कारण ऐसी स्थिति हासिल की जा सकी है। किसान नीतीश कुमार ने कहा कि उन्होंने खेत में गोबर की खाद, वर्मी कंपोस्ट, वॉम स्टार सहित कई मिश्रणों का इस्तेमाल किया।
गौरतलब है कि नालंदा में राज्य जैविक सब्जी प्रोत्साहन कार्यक्रम के तहत 2,500 हेक्टेयर में किसानों को जैविक उत्पादन क्रय करने का लाभ दिया जा रहा है। आलू उत्पादन का यह रिकार्ड अन्य किसानों के बीच व्याप्त कई भ्रांतियों को दूर करेगा।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बुधवार को बिहार विधानसभा में नालंदा के किसानों को आलू उत्पादन में रिकार्ड बनाने के लिए बधाई दी। उन्होंने सदन को सूचित किया कि नालंदा के किसानों ने जैविक खेती के जरिए प्रति हेक्टेयर 729 क्विंटल आलू का उत्पादन किया है। अब तक यह रिकार्ड हॉलैंड के नाम था, जहां प्रति हेक्टेयर 535 क्विंटल आलू का उत्पादन हुआ था। उल्लेखनीय है कि देशपुरवा के किसानों ने श्रीविधि तकनीक से धान का उत्पादन प्रति हेक्टेयर 224 क्विंटल तक पहुंचा दिया है, जबकि पारंपरिक तरीके से यहां प्रति हेक्टेयर धान का उत्पादन 80 क्विंटल होता था। नालंदा के जिलाधिकारी भी मानते है कि केवल देशपुरवा के निवासी ही नहीं, बल्कि जिले के सैकड़ों किसान उत्पादन में अभूतपूर्व वृद्धि कर रहे है। उन्होंने कहा कि पहले तो किसान पारंपरिक खेती को छोड़ने और आधुनिक तकनीक अपनाने को तैयार ही नहीं थे, परंतु प्रशासन द्वारा नई तकनीक से होने वाले नुकसान की भरपाई किए जाने के वादे के बाद किसान तैयार हो गए और अब नतीजा सबके सामने है।
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