Monday, 5 March 2012

अपनी भारत की संस्कृति को पहचाने ---

दो पक्ष - कृष्ण पक्ष एवं शुक्ल पक्ष !

तीन ऋण - देव ऋण, पित्र ऋण एवं ऋषि त्रण !

चार युग - सतयुग , त्रेता युग , द्वापरयुग एवं कलयुग !

चार धाम - द्वारिका , बद्रीनाथ, जगन्नाथ पूरी एवं रामेश्वरम धाम !

चारपीठ - शारदा पीठ ( द्वारिका ), ज्योतिष पीठ ( जोशीमठ बद्रिधाम), गोवर्धन पीठ ( जगन्नाथपुरी ) एवं श्रन्गेरिपीठ !

चर वेद- ऋग्वेद , अथर्वेद, यजुर्वेद एवं सामवेद !

चार आश्रम - ब्रह्मचर्य , गृहस्थ , बानप्रस्थ एवं संन्यास !

चार अंतःकरण - मन , बुद्धि , चित्त , एवं अहंकार !

पञ्च गव्य - गाय का घी , दूध , दही , गोमूत्र एवं गोबर , !

पञ्च देव - गणेश , विष्णु , शिव , देवी और सूर्य !

पंच तत्त्व - प्रथ्वी , जल , अग्नि , वायु एवं आकाश !

छह दर्शन - वैशेषिक , न्याय , सांख्य, योग , पूर्व मिसांसा एवं दक्षिण मिसांसा !

सप्त ऋषि - विश्वामित्र , जमदाग्नि , भरद्वाज , गौतम , अत्री , वशिष्ठ और कश्यप !

सप्त पूरी - अयोध्या पूरी , मथुरा पूरी , माया पूरी ( हरिद्वार ) , कशी , कांची ( शिन कांची - विष्णु कांची ) , अवंतिका और द्वारिका पूरी !

आठ योग - यम , नियम, आसन , प्राणायाम , प्रत्याहार , धारणा , ध्यान एवं समाधी !

आठ लक्ष्मी - आग्घ , विद्या , सौभाग्य , अमृत , काम , सत्य , भोग , एवं योग लक्ष्मी !

नव दुर्गा - शैल पुत्री , ब्रह्मचारिणी , चंद्रघंटा , कुष्मांडा , स्कंदमाता , कात्यायिनी , कालरात्रि , महागौरी एवं सिद्धिदात्री !

दस दिशाएं - पूर्व , पश्चिम , उत्तर , दक्षिण , इशान , नेत्रत्य , वायव्य आग्नेय ,आकाश एवं पाताल !

मुख्या ग्यारह अवतार - मत्स्य , कच्छप , बराह , नरसिंह , बामन , परशुराम , श्री राम , कृष्ण , बलराम , बुद्ध , एवं कल्कि !

बारह मास - चेत्र , वैशाख , ज्येष्ठ ,अषाड़ , श्रावन , भाद्रपद , अश्विन , कार्तिक , मार्गशीर्ष . पौष , माघ , फागुन !

बारह राशी - मेष , ब्रषभ , मिथुन , कर्क , सिंह , तुला , ब्रश्चिक , धनु , मकर , कुम्भ , एवं कन्या !

बारह ज्योतिर्लिंग - सोमनाथ , मल्लिकर्जुना , महाकाल , ओमकालेश्वर , बैजनाथ , रामेश्वरम , विश्वनाथ , त्रियम्वाकेश्वर , केदारनाथ , घुष्नेश्वर , भीमाशंकर एवं नागेश्वर !

पंद्रह तिथियाँ - प्रतिपदा , द्वतीय , तृतीय , चतुर्थी , पंचमी , षष्ठी , सप्तमी , अष्टमी , नवमी , दशमी , एकादशी , द्वादशी , त्रयोदशी , चतुर्दशी , पूर्णिमा , अमावश्या !

स्म्रतियां - मनु , विष्णु, अत्री , हारीत , याज्ञवल्क्य , उशना , अंगीरा , यम , आपस्तम्ब , सर्वत , कात्यायन , ब्रहस्पति , पराशर , व्यास , शांख्य , लिखित , दक्ष , शातातप , वशिष्ठ !

By : Sachin Khare

Saturday, 3 March 2012

=============Sh are this===========
150 rupee coin in India soon
For the first time in the country’s minting history, government will issue coins of Rs. 150, marking the number of years of taxation in India.
... The special coins, to be released by Finance Minister Pranab Mukherjee before his Budget speech, will also be brought out in Rs. 5 denomination on the occasion of completion of 150 years, from 1860 to 2010, of the Income Tax d...epartment.
This is the first time that coins of Rs. 150 denomination are being minted by the government. The Department of Economic Affairs under the Finance Ministry recently notified the order.
The Rs. 150 coin, made of an alloy of Silver, Copper, Nickel and Zinc, will have an international design with ‘Satyameva Jayate’ and ‘India’ on the front side while a portrait of ‘Chanakya and lotus with honeybee’ on the reverse side.
By : The Great Indians

Friday, 2 March 2012

,ॐ,---- की ब्याख्या अवश्य पढे , कही नही मीलेगा -----------
जिस तरह सात समन्दर, सप्त ऋषी ,रेनबो मे सात रंग , सुर मे सात सुर ,
उसी तरह ,ॐ, मे तिन ध्वनि तरंग होता है ,अ उ म जीसका मान भी 7 होता है ,
जैसे अ का मान 1 , उ का मान 5 , म का मान 37 - 1+ 5 + 3 + 7 =16- 1+6 = , 7 , सात सुर मे भी म बीच मे आता है , इसलिये अपनी जननी को माँ
पूकारते है माँ भी ,ॐ, जैसा हीं 1 शब्द है , 7 लक्की नंबर भी होता है ,
,,ॐ से ही दुनियां सुरू और ॐ से ही दुनियां खत्म होता है,,,,,,
ॐ या अ उ म , ये परब्रम्ह सदाशिव की परब्रम्ह शक्ती या ध्वनि तरंग है ,
इस ॐ ध्वनि तरंग के तीनो , दो या एक शव्द का मिश्रण हर प्राणी , जीव- जन्तु
के आवाज मे निहीत है ,जिसे आप भी सुनकर महसुस कर सकते है ,बच्चो के रोने
मे तीनो ध्वनि ,गाय के आवाज मे तीनो ध्वनि , और बिल्ली की आवाज मे
उल्टा तीनो ध्वनि ,।, कोइ भी बिष्फोट या ब्लाष्ट मे , बिजली की कङक ,
हर प्राणी के आवाज मे तीनो , दो या एक शव्द का उच्चारन आता ही आता है , इन ध्वनियो को किसी का सबूत नही चाहिये ये ध्वनि अपने आप मे अमर ध्वनि है , इन ध्वनियो को हमारे पूर्वजो ने भी पहचाना था इसलिये कुछ जीवो को हमारे लिये , मनहूस करार दिया, आप भी परख सकते है इन ध्वनियो को, ये हर जीव के आवाज मे होता है , चाहे जीव का रोना हो बोलना हो , हुकारना हो रम्हाना हो , दहाङना हो , चित्कारना हो या घुर्राना , किसी जीव के ध्वनि मे धनात्मक ऊर्जा ,
या ऋणात्मक ऊर्जा , होती है , लेकिन ध्वनि ऊर्जा का श्रोत ॐ या अ उ म हीं है ,,,,,,,,,,,हर हर महादेव ,,,,,,,,
हमने BEING HINDU टी -शर्ट बनवाने का निर्णय लिया है, कंपनी से भी बात हो गयी है, जो लोग वास्तविक रूप में इच्छुक हो इस टी शर्ट को पेहेंने के लिए वो इस नंबर पर हमसे संपर्क करें- +919990522350
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Monday, 20 February 2012

" मेरे प्रभु!
मुझे इतनी ऊँचाई कभी मत देना,
ग़ैरों को गले न लगा सकूँ,
इतनी रु...खाई कभी मत देना। "

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ऊँचे पहाड़ पर,
पेड़ नहीं लगते,
पौधे नहीं उगते,
न घास ही जमती है।

जमती है सिर्फ बर्फ,
जो, कफ़न की तरह सफ़ेद और,
मौत की तरह ठंडी होती है।
खेलती, खिलखिलाती नदी,
जिसका रूप धारण कर,
अपने भाग्य पर बूंद-बूंद रोती है।

ऐसी ऊँचाई,
जिसका परस
पानी को पत्थर कर दे,
ऐसी ऊँचाई
जिसका दरस हीन भाव भर दे,
अभिनंदन की अधिकारी है,
आरोहियों के लिये आमंत्रण है,
उस पर झंडे गाड़े जा सकते हैं,

किन्तु कोई गौरैया,
वहाँ नीड़ नहीं बना सकती,
ना कोई थका-मांदा बटोही,
उसकी छाँव में पलभर पलक ही झपका सकता है।

सच्चाई यह है कि
केवल ऊँचाई ही काफ़ी नहीं होती,
सबसे अलग-थलग,
परिवेश से पृथक,
अपनों से कटा-बँटा,
शून्य में अकेला खड़ा होना,
पहाड़ की महानता नहीं,
मजबूरी है।
ऊँचाई और गहराई में
आकाश-पाताल की दूरी है।

जो जितना ऊँचा,
उतना एकाकी होता है,
हर भार को स्वयं ढोता है,
चेहरे पर मुस्कानें चिपका,
मन ही मन रोता है।

ज़रूरी यह है कि
ऊँचाई के साथ विस्तार भी हो,
जिससे मनुष्य,
ठूँठ सा खड़ा न रहे,
औरों से घुले-मिले,
किसी को साथ ले,
किसी के संग चले।

भीड़ में खो जाना,
यादों में डूब जाना,
स्वयं को भूल जाना,
अस्तित्व को अर्थ,
जीवन को सुगंध देता है।

धरती को बौनों की नहीं,
ऊँचे कद के इंसानों की जरूरत है।
इतने ऊँचे कि आसमान छू लें,
नये नक्षत्रों में प्रतिभा की बीज बो लें,

किन्तु इतने ऊँचे भी नहीं,
कि पाँव तले दूब ही न जमे,
कोई काँटा न चुभे,
कोई कली न खिले।

न वसंत हो, न पतझड़,
हो सिर्फ ऊँचाई का अंधड़,
मात्र अकेलेपन का सन्नाटा।

मेरे प्रभु!
मुझे इतनी ऊँचाई कभी मत देना,
ग़ैरों को गले न लगा सकूँ,
इतनी रुखाई कभी मत देना।
कितनी बार कुछ धरम और संस्कृति आधारित सवालों पर
कूल ड्यूड और लो वेस्ट जींस पहन कर युवा अपना ऐसा बात
कहते हैं जैसे कोई पोप ,परम हंस या कोई इमाम हो ........
मुह से शराब की बॉस आ रही है लेकिन संस्कृति और धरम
को गरियाये जा रहे हैं ........
५ दिन से नहाये नहीं हैं लेकिन पूछते हैं मंदिर जाने से क्या फायदा ......
गर्लफ्रेंड को पिक्चर दिखा के आ रहे हैं कोई साधू
मिला तो कह दिया ......अरे तुम नहीं जानती हो जान ये
ढोंगी है .......
फिल्म के गानों को सुन रहे है, सुनते - सुनते सो गए,सुबह
पैखाने में भी लगा है ईयर फ़ोन ,फिर बस में भी ......और हनुमान चालीसा और वन्देमातरम् के लिए...अरे बचपन में याद था भूल
गयी ....... भाई एक बात बताओ ......५ साल की उम्र से पढ़ रहे
हो .....गणित,विज्ञान ,अंग्रेजी घिस रहे हो .......कोचिंग
में चूस रहे हो .......कालेज में पक रहे हो......फिर भी परीक्षाओं में
नप रहे हो ..........
तो जब आज तक वेद की एक ऋचा नहीं पता ,मानस की चौपाई
नहीं पता ,गीता का श्लोक नहीं पता , ....तो फिर भाई ......क्यों बोलते हो ऐसे की जैसे परमहंस हो .......
यार,आध्यात्म का उदय श्रद्धा और विश्वास से
होता है ...."भवानी शंकरौ बन्दे श्रद्धा विश्वास
रुपिणौ".....और ये ज्ञान से मिलेगा ..........जब शुरू
करोगे ....ज्यादा नहीं ५ मिनट सही ...शुरू तो करो .......
कृपया तार्किक बनें ...स्वागत है लेकिन अपने को सीमाओं में रखते हुए .........हो सकता है की अगले व्यक्ति ने ...जो आप के
सामने खड़ा हो .....साधारण सा .....अपना जीवन
दिया हो उसको समझने में .... साभार---"खून स्याही में उबलने दे

Friday, 17 February 2012

जय जय सियाराम , जय जय श्री राधेकृष्ण , जय जय सनातन संस्कृति , जय जय माँ भारती
अगर हर वस्तु हर कण में भगवा होता तो कैसा होता ?


हर पत्ता हर कण राम राम का गुणगान करता |
जिस तरफ नज़र जाती भगवा ही भगवा नज़र आता ||

हर बृक्ष भगवा होता हर फल भगवा होता |
हर शाख भगवा होती हर फूल भगवा होता ||

हर पर्वत भगवा बन सीना ताने मुस्कुराता |
हर गलीचा जैसे माँ भारती का दामन नज़र आता ||

आकाश में जब पक्षी भगवा रंग में दीखते |
मन प्रफुलित हो श्री राम श्री राम चिल्लाता ||

हर मंदिर पर भगवा ध्वज ध्वज होता |
ना होती कोई मस्जिद ना कोई चर्च नज़र आता ||

साधू संतो की संगत होती सत्संग में रस समता |
श्री राम श्री कृष्ण के जयकारो से पूरा विश्व गूंज जाता ||

जैसे मेरा तन है भगवा मेरा मन है भगवा |
मैं मिलता जब माटी में तो उसका रंग भी होता भगवा ||

_________________________ जीत शर्मा " मानव "

भाई पंकज की प्रेरणा से .........

जय जय सियाराम , जय जय श्री राधेकृष्ण , जय जय सनातन संस्कृति , जय जय माँ भारती